दूसरों के साथ साझा करें


हमारे मरने के बाद क्या होता है?

हमारे मरने के बाद क्या होता है?

बहुत से लोग चिंतित हैं कि मृत्यु के बाद क्या होता है। कुछ लोग कहते हैं कि मृत्यु जीवन का पूर्ण अंत है, इसलिए, वे परिणामों के डर के बिना जीवन जीते हैं। दूसरों का कहना है कि मृत्यु के बाद न्याय आएगा जिसके लिए लोगों को अभी से उचित रूप से जीवन निर्वाह करके तैयारी करनी चाहिए।

मृत्यु के बाद न्याय और जीवन होगा

बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर का अस्तित्व है और हमारे भौतिक, मूर्त क्षेत्र के अलावा एक जीवन है और अब भी मौजूद है। जो हम देख सकते हैं वह अस्थायी है और परमेश्वर द्वारा बनाया गया है, जिसको हम देख नहीं सकते (2 कुरिन्थियों 4:18)। यह अनन्त और अदृश्य परमेश्वर है, जिसने एक उद्देश्य के लिए, जो कुछ दिखाई देता है  उसे बनाया है, जिसमें पृथ्वी, पेड़, जानवर, और मनुष्य शामिल हैं (इफिसियों 3: 9,11), (कुलुस्सियों 1:16), (1 तीमुथियुस 1:17)। जिस प्रकार परमेश्वर अनन्तता के दायरे में है, इसलिए मृत्यु के बाद का जीवन परमेश्वर के आने वाले न्याय से निर्धारित होता है इस वर्तमान दृश्यमान दायरे के बाद भी (इब्रानियों 9:27)।

मृत्यु के बाद जीवन के दो मुख्य प्रकार

1) जो लोग परमेश्वर के रचना के उद्देश्य को पूरा करते हैं, अर्थात्, जो मानते हैं कि मसीह उनके पापों के लिए मारा गया और उनके न्यायिकरण के लिए पुनरूत्थित हो गया और जो परमेश्वर को अपने अंदर जीवन के रूप में लेते हैं  कि उसके साथ एक हो जाए, परमेश्वर के साथ रहेंगे, परमेश्वर के साथ एक होंगे, और पूरी पृथ्वी पर परमेश्वर के साथ शासन करेंगे। (यूहन्ना 3: 16-18) यह सबसे अच्छी मुमकिन बात है जो मृत्यु के बाद किसी के साथ हो सकती है।

2) जो आज परमेश्वर से रहित हैं, वे अनंत काल तक प्रेम करने वाले परमेश्वर से अलग रहेंगे।  वे आग की झील में कष्ट भुगतेंगे, शैतान (दुष्ट) और उसके गिरे हुए स्वर्गदूतों को एक साथ जलाया जाएंगा। (यूहन्ना 3:16-18) आग की झील मनुष्य के लिए नहीं बल्कि शैतान और उसके स्वर्गदूतों के लिए तैयार की गई थी। हालाँकि, सभी मानव जाति आदम के पतन के परिणामस्वरूप शैतान के साथ  एक हो  गई। क्योंकि कुछ लोग कई चेतावनियों और अवसरों के बावजूद परमेश्वर की ओर फिरते नहीं हैं, परमेश्वर को उन्हें शैतान के साथ अनंत काल बिताने और उसके साथ यातना में साझा करने के लिए त्यागना  पढ़ेगा। यह मृत्यु के बाद के जीवन का अत्यंत बुरा प्रकार है। हम आशा करते हैं कि जितना संभव हो उतना अधिक परमेश्वर की ओर फिरेंगे और खासकर आप जो इसे पढ़ रहे हैं।

निर्णायक कारक जिसके लिए आपके पास प्ररूप होगा

ऐसा जीवन जीने के लिए जो हमें आने वाले न्याय का सामना करने के लिए तैयार करेगा, हमें पहले पता लगाना चाहिए कि क्या प्रतिफल होगा और क्या अस्वीकृत किया जाएगा। बहुत से लोगों को यह गलत फहमी है कि जो इंसान धरती पर रहते हुए अच्छे काम करेगा, वह स्वर्ग जाएगा, जबकि जो इंसान बुरे काम करेगा वह नरक में जाएगा। यह अवधारणा बाइबल के अनुसार नहीं है। यदि आप मृत्यु के बाद जीवन के दो प्रकारों को ध्यान से पढ़ते हैं, तो आप कुछ अलग देखेंगे। अनंत काल तक किसी का जीवन कैसा होगा, इसका निर्णायक कारक पृथ्वी पर रहते हुए किसी का व्यवहार नहीं है, बल्कि यह है कि किसी ने मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान पर विश्वास किया है  या नहीं और परमेश्वर को जीवन के रूप में ग्रहण किया है  या नहीं (यूहन्ना 3: 16-18)।

मनुष्य की समस्या

हालाँकि मनुष्य को परमेश्वर के द्वारा निर्मित किया गया था, फिर भी मनुष्य को परमेश्वर को जीवन के रूप में लेने या शैतान को लेने का विकल्प दिया गया था। मनुष्य ने शैतान को लेने का चुनाव किया, जिसने तब मनुष्य में प्रवेश किया और मनुष्य में पापी स्वभाव बन गया। मनुष्य अपने फ़ितरत में पापी बन गया और अपने कार्यों में पापों से भरा हुआ है। अब मनुष्य के भीतर एक तत्व है जो अधर्म से प्यार करता है और धार्मिकता से नफरत करता है, जो पाप और अंधेरे से प्यार करता है और प्रकाश से नफरत करता है। वह सब जो परमेश्वर ने मनुष्य को चाहा, मनुष्य नहीं है। परमेश्वर के बिना मनुष्य पाप में रहता है और अपनी आत्मा में मृत है, मनुष्य का वह भाग जो परमेश्वर से संपर्क करने और उसको समाविष्ट करने के लिए बनाया गया था। यदि मनुष्य पश्चाताप नहीं करता है, तो मनुष्य अनंत काल तक शैतान के साथ अपराधी ठहरता है।

परमेश्वर का उद्धार

लेकिन परमेश्वर, जो अपने महान प्रेम के कारण दया में समृद्ध है, जिसके साथ वह मनुष्य को प्रेम करता है, वह अपने सृजे हुए मनुष्य को शैतान का शिकार बनने और शैतान के साथ आग की झील में समाप्त होते देखने के लिए तैयार नहीं है। यह प्रेम ही है जिसने परमेश्वर को सताई हुई मानवता के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया,  मनुष्य को विनाश से बचाने के लिए सही स्थानापन्न के रूप में मरा (रोमियों 5: 8)। फिर वह पुनरूत्थित हो गया कि एक जीवन दायक आत्मा बन जाए उन सभी के लिए, जो उस पर विश्वास करते हैं और उसे प्राप्त करते हैं (रोमियों 4:25), (1 यूहन्ना 5:12)।

जब आप उसे प्राप्त करते हैं, तो वह परमेश्वर के जीवन को आपके अंदर लाएगा। परमेश्वर आपका जीवन होगा और आपके साथ एक होगा (1 कुरिन्थियों 6:17)। फिर आपको अपने पूरे अस्तित्व को भरने के लिए उसे अपने अंदर बढ़ने देना चाहिए। यह आपको शैतानी स्वभाव से छुड़ाएगा जो आपके जन्म के बाद से आप में है। जितना अधिक वह आप में बढ़ता है, उतना ही आप शैतान के अत्याचार से मुक्त होंगे। आप प्यार करेंगे जैसा कि परमेश्वर करता है। आप धर्मी होंगे जैसा कि परमेश्वर धर्मी है। आप परमेश्वर के सभी दिव्य गुण, जैसे कि प्रेम, ज्योति, पवित्रता, धार्मिकता, दया, आदि को व्यक्त करेंगे। परमेश्वर के साथ, परमेश्वर में और परमेश्वर के साथ पृथ्वी पर रहने के बाद, आप निश्चित रूप से न्याय की अवस्था में अनुमोदित होंगे (यूहन्ना 14:20)। आपका निश्चित रूप से परमेश्वर के साथ एक जीवन होगा क्योंकि आप पहले से ही इस भौतिक जीवन के दौरान उनके अनन्त जीवन का आनंद ले रहे हैं (प्रकाशितवाक्य 22: 5,7)।

यदि आप अभी तक परमेश्वर की ओर फिरे नहीं है और यीशु मसीह के द्वारा उसके जीवन को प्राप्त नहीं किया है, तो आपका जीवन अभी भी शैतान से भरा हुआ है, और आप पहले से ही दंडित हैं (यूहन्ना 8:44), (इफिसियों 2:12), (मत्ती 25:41) , (रोमियों 1:28)। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितना अच्छा करने की कोशिश करते हैं, आप कभी भी अच्छे नहीं होंगे। आप कभी-कभी धर्मी हो सकते हैं, लेकिन हर समय नहीं। हो सकता है कि आप सभी लोगों को प्यार दिखाते हो, लेकिन आप वास्तव में उनमें से कुछ को अपने दिल के अंदर गुप्त रूप से नफरत करते हो। ऐसा इसलिए नहीं है कि आप एक ईमानदार व्यक्ति बनने की इच्छा नहीं रखते हैं, बल्कि इसलिए कि आपके पास दिव्य जीवन के सशक्तिकरण का अभाव है। परमेश्वर परमेश्वर है और शैतान शैतान है। यदि आपके पास शैतान है, लेकिन परमेश्वर नहीं है, तो आप इस जीवन में कभी भी सिद्ध नहीं हो सकते हैं, और आप निश्चित रूप से न्याय के बाद शैतान के साथ आग की झील में होंगे। यदि आपके अंदर परमेश्वर का वास है, तो आप इस जीवन में परमेश्वर के समान सिद्ध हो सकते हैं, और आप निश्चित रूप से परमेश्वर के साथ रहेंगे और परमेश्वर के साथ अनन्तकाल तक एक रहेंगे (1 थिस्सलुनीकियों 1: 9-10), (उत्पत्ति 2: 9), ( व्यवस्थाविवरण 30:19)। आपको जरूरत है यीशु के नाम को पुकारने के द्वारा उसे ग्रहण करने  की और उसके सामने स्वीकार करना कि आप पापी हो और आपको अपने उद्धार के रूप में उसकी आवश्यकता है (रोमियों 5:19), (रोमियों 7:20), (रोमियों 3:23), (रोमियों 6:23), (यूहन्ना 4:24), (यूहन्ना 3:19), (यूहन्ना 12:46)।

इस तरह से प्रार्थना करें: "हे प्रभु यीशु, मैं जानता हूं कि आपने मुझे बनाया है। मैं जानता हूं कि मेरे पास पाप है और आपका जीवन नहीं है। मैं विश्वास करता हूं कि आप मेरे लिए मारे गए। मेरा जीवन होने के लिए मेरे अंदर आओ, मैं आपके साथ अभी और हमेशा के लिए रहना चाहता हूं।”

फिर आपको हर रोज बाइबल पढ़ने और प्रार्थना करने और विश्वासियों के साथ मिलने की ज़रूरत है ताकि आप उसमें बड़ सकें और परमेश्वर के लोगों के साथ गठित हो सकें (1 पतरस 2: 2), (इफिसियों 4:15), (1 यूहन्ना 3) : 14), (मार्क 10:18), (फिलिप्पियों 4:13), (फिलिप्पियों 4:13), (मत्ती 5:48), (रोमियों 10:13)। इसके द्वारा, आपको अपने नियति का आश्वासन दिया जाएगा (प्रेरितों के काम 2:28)।


दूसरों के साथ साझा करें